ये खूंखार नक्सली करता था बारूद का कारोबार, गुर्गों के साथ चढ़ा पुलिस के हत्थे

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बिहार पुलिस ने राज्य के नक्सल प्रभावित गया जिले से एक हार्डकोर नक्सली को उसके दो सहयोगियों के साथ 6 जून को एनएच दो पर डोभी मोड़ से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किया गया हार्डकोर नक्सली रूपेश कुमार सिंह बिहार के भागलपुर जिला के शाहकुंड थाना क्षेत्र के सरौनी गांव का रहनेवाला है। वह नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के क्राइम ब्यूरो टेक्निकल के स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य है। जानकारी के अनुसार, वह डुमरिया थाना क्षेत्र के छकरबंधा में नक्सलियों को विस्फोटक की सप्लाई करने जा रहा था। इस नक्सली के साथ 4 जून को कार सहित लापता हुए रामगढ़ के अधिवक्ता मिथिलेश कुमार सिंह को भी गया पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

इसके अलावा कार चालक मो. कलाम भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, रूपेश के साथ गिरफ्तार सहयोगी मिथिलेश कुमार सिंह और चालक मोहम्मद कलाम दोनों रामगढ़ (झारखंड) के रहने वाले हैं। मौके से कार में रखा भारी मात्रा में जिलेटिन व नक्सली साहित्य भी बरामद हुआ है। गौरतलब है कि अधिवक्ता सहित तीन लोगों के लापता होने के मामले में कार चालक मोहम्मद कलाम के भाई ने रामगढ़ थाना में प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। इधर, गया पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हजारीबाग की ओर से नक्सली विस्फोटक लेकर छकरबंधा जा रहे हैं।

गया पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल एसटीएफ की टीम गठित कर डोभी मोड़ पर वाहन चेकिंग शुरू कर दी गई। इसी दौरान झारखंड की नंबर प्लेट वाली एक सिल्वर कलर की स्विफ्ट डिजायर कार को पुलिस ने जब चेक किया, तो कार में विस्फोटक पाया गया। उस कार में अधिवक्ता मिथिलेश कुमार सिंह, नक्सली रूपेश कुमार सिंह और कार चालक मोहम्मद कलाम मौजूद थे। सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कार से 15 बंडल डेटोनेटर भी बरामद किए गए। प्रत्येक बंडल में 25 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर है। इसके अलावा 32 पीस जिलेटिन छड़, नक्सली साहित्य, तीन मोबाइल और एक चिप बरामद किया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चिप के माध्यम से ही शीर्ष नक्सलियों से कॉन्टेक्ट किया जाता था। एसटीएफ टीम का नेतृत्व कर रहे एएसपी (नक्सल अभियान) अरुण कुमार सिंह के मुताबिक बरामद कार भाड़े की है। पुलिस रूपेश की गिरफ्तारी को बड़ी उपलब्धि मान रही है, क्योंकि रूपेश आसपास के कई राज्यों में एमसीसी के लिए विस्फोटक पहुंचाने का काम करता था। पुलिस के अनुसार इसके पूर्व भी वह तीन खेप विस्फोटक की सप्लाई कर चुका है। वह एमसीसी आईसीआरबी टेक्निकल टीम का सदस्य भी है। उसका काम विस्फोटक पहुंचाना है। लेकिन, पता लगाया जा रहा है कि कार किसकी और कहां की है। हार्डकोर नक्सली रूपेश झारखंड से छपने वाली ‘लाल सिंह माटी’ पत्रिका का कथित संपादक भी है।

मिथिलेश सिंह और उनके साथी रूपेश सिंह ने एक बड़ी नक्सली वारदात को अंजाम देने की योजना तैयार की थी। पूरी योजना रामगढ़ शहर में ही बनाई गई थी और उसमें नई सराय निवासी मोहम्मद कलाम की भूमिका भी अहम थी। यह बात 7 मई को एएसपी अभियान गुलशन तिर्की ने बताई। उन्होंने कहा कि गया जिले की पुलिस ने एनएच 2 पर उन तीनों को मारुति स्विफ्ट डिजायर गाड़ी के साथ पकड़ा। जिसमें भारी मात्रा में डेटोनेटर, जिलेटिन और नक्सली साहित्य मौजूद था। उन लोगों के द्वारा यह सामान नक्सली घटना को अंजाम देने के लिए चकरबंदा के जंगल में पर ले जाया जा रहा था, जहां बारूद की एक बड़ी मात्रा मौजूद थी।

गया पुलिस ने उन तीनों को पकड़ा और उनकी निशानदेही पर कई स्थानों पर छापेमारी भी की। उनकी सूचना के बाद रामगढ़ जिला पुलिस भी हाईअलर्ट हो गई और रामगढ़ में बिंझार, नईसराय और रोबा कॉलोनी में भी छापेमारी की गई। एएसपी अभियान ने बताया कि उन तीनों के आवास को पूरी तरीके से खंगाला जा रहा है। भाकपा माओवादी नक्सली संगठन के स्पेशल एरिया कमेटी में रूपेश और मिथलेश का नाम शामिल है। रामगढ़ शहर में रूपेश और मिथलेश ने एक बड़ा मकान बना कर रखा है। उन दोनों के पेशे कहने के लिए तो अलग-अलग हैं, लेकिन उनका पूरा काम नक्सली संगठन से ही जुड़ा हुआ है। उनकी टेलीफोन डायरेक्टरी को भी खंगाला जा रहा है।

इसके अलावा रामगढ़ शहर में जिन लोगों से भी उनके संबंध हैं, उनके बारे में भी पूछताछ की जा रही है। एएसपी अभियान ने कहा कि रामगढ़ थाने में मोहम्मद एजाज नामक व्यक्ति ने अपने भाई मोहम्मद कलाम और उसकी गाड़ी के साथ मिथिलेश सिंह और रूपेश सिंह के लापता होने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस अब उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। पुलिस की जांच में यह बात सामने आ रही है कि मिथिलेश सिंह और उसकी टीम ने खुद का बचाव करने के लिए एक साजिश के तहत रामगढ़ थाने में झूठा आवेदन दिलवाया है। इस मामले को लेकर पुलिस काफी गंभीर है और मोहम्मद एजाज के संबंध भी नक्सलियों के साथ तो नहीं है इसकी भी जांच की जा रही है।

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