पाकिस्तान की हर नापाक हरकत पर है नज़र, नहीं छिप सकती उसकी कोई भी करतूत

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देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर ISRO शुरुआत से मददगार साबित रही है। नई-नई टेक्नोलॉजी के ज़रिए राष्ट्र-निर्माण के साथ-साथ देश की आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा में मदद करती रही है। देश की सुरक्षा में जहां भारत की तीनों सेनाएं अपनी तकनीकि, मिसाइल प्रणाली और आधुनिक हथियारों के साथ लैस रहती हैं तो वहीं इसके अलावा भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) भी अपना योगदान करती रही है।

भारत ने सेटेलाइट के जरिए अपनी सैन्य ताकत को मज़बूत करने के लिए साल 2005 में पहला कार्टोसेट और इसके दो साल बाद सन 2007 में कार्टोसेट-2A लॉन्च किया गया था। इन सभी सेटेलाइट के ज़रिए भारत पड़ोसी देशों के मिसाइल प्रक्षेपण की निगरानी करने में सक्षम है। यह समय-समय पर अपडेट होता रहता है। जून 2016 में कार्टोसेट-2C लॉन्च किया गया था जो संवेदनशील लक्ष्यों की वीडियो रिकॉर्डिंग करने में सक्षम है। इसी सेटलाइट में अगला कार्टोसैट-2E, जून 2017 में लॉन्च किया गया था। पिछले साल भी इसरो ने सैन्य उपयोग के लिए कई उपग्रह एक साथ लॉन्च किए थे।

कार्टोसेट सेटेलाइट्स की सभी सीरीज भारतीय सेनाओं की मदद प्रमुखता से करती हैं, जिसमें जीसैट-7, जीसैट-7A, भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली तारामंडल, मिक्रोसैट, रिसैट और हाल में ही लॉन्च हुई HysIS सेटेलाइट शामिल हैं। इन्हीं उपग्रहों की मदद से भारत ने 2016 में पाकिस्तान में पहली सर्जिकल स्ट्राइक की थी। किसी खास जगह पर फोकस करके उस क्षेत्र की सारी जानकारी देने में सक्षम है। भारत 14 देशों के लगभग 55 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर नजर रखने में सक्षम है।

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इसरो अपने सेटेलाइट के जरिए पाकिस्तान पर बारीकी से नजर रख सकता है और पाकिस्तान के ज़्यादातर हिस्सों पर अंतरिक्ष से नजर रखने में पूरी तरह से सक्षम है। इन सभी सेटेलाइट्स के जरिए न केवल पाकिस्तानी सेना की गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है, बल्कि भारतीय सेनाओं या सशस्त्र बलों के रास्ते में आने वाली हर रुकावट का भी अनुमान लगाया जा सकता है। इन्हीं सब टेक्नालोजी के ज़रिए दुश्मन मुल्क में एयर स्ट्राइक करना बेहद आसान है।

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