हाइब्रिड नेटवर्क वॉर की जद में भारत

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एक बात सत्य है कि भारत की जनता पाकिस्तान की हाइब्रिड नेटवर्क वॉर (Hybrid Network War) का धड़ल्ले से शिकार हो रही है। ताजा उदाहरण है पिछले दिनों यानी 28 फरवरी, 2019 को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को छोड़ने का ऐलान पाक संसद में इमोशनल अंदाज में करना। फिर भारत के लोगों का भावनाओं में बहकर सहानुभूति प्रदान करना।

इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है कि 27 फरवरी, 2019 को भारत के MEA के स्पोक्सपर्सन रवीश कुमार ने जैसे ही इस बात को प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि हमारा एक पायलट मिसिंग है, उसके कुछ मिनटों बाद ही पाक पीएम इमरान खान ने प्रेस कांफ्रेंस कर भारतीय नागरिकों के सेंटिमेंट्स से खेला और उसका असर भी दिखा कि इमरान खान की बातों से कैसे भारतीय नागरिक भावनाओं में बह गए। इमरान ने कहा, “पुलवामा हमले के बाद हमने हिंदुस्तान को ऑफर किया था हम किसी भी किस्म की जांच के लिए तैयार हैं। पुलवामा में इतनी कैजुअलिटीज़ हुईं। मुझे पता है कि उनके परिवार वालों को कितनी तकलीफ पहुंची होगी। हमने खुद पिछले 10 साल में 70 हजार कैजुअलिटीज़ झेली हैं।” फिर अगले ही दिन इमरान ने पाकिस्तानी संसद में अभिनंदन की रिहाई का ऐलान करके बाकी माइलेज भी ले लिया।

दूसरी घटना मसूद अजहर मारा गया का हेडलाइन। तो कुछ एक का ये कहना कि वह आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती है और अंतिम अवस्था में है। जबकि, मामला यह है कि ये सारे कैलकुलेशन पाकिस्तान, वर्ल्ड मीडिया और भारत की जनता का ध्यान भटकाने के लिए कर रहा है।

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क्या है हाइब्रिड नेटवर्क वॉर?

हाइब्रिड वॉर नए किस्म की लड़ाई है, जिसे हम आम बोल-चाल की भाषा में छद्म युद्ध भी कहते हैं। दरअसल, यह एक प्रकार का जियोपॉलिटिक्स भी है। यह वह सैनिक रणनीति है जिसमें राजनीतिक युद्ध में परंपरागत युद्ध को अनियमित युद्ध, साइबर युद्ध और मनोवैज्ञानिक युद्ध के साथ ब्लेंड किया जाता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं लड़ी जाती, इसमें जनता की सोच को बदलने की कवायद होती है। हाइब्रिड वॉर के तहत अफवाहें, गलत जानकारियां और फेक न्यूज फैलाई जाती हैं। लगातार ऐसा करते रहने से आम जनता की सोच बदलने लगती है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में ऐसा करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान है।

दुश्मन क्यों देते हैं इसे तरजीह?

हथियारों और सेना के बल पर होने वाली लड़ाई में जान-माल का बहुत नुकसान होता है। ऐसे युद्ध बेहद खर्चीले भी होते हैं। लेकिन हाइब्रिड वॉर इनसे अलग है। यह लगातार आम लोगों की सोच पर चोट करता रहता है। विश्व के रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, खासकर यूरोपियन विशेषज्ञों पोलैंड की सुरक्षा एजेंसी एबीडब्ल्यू ने पिछले साल रूस पर आरोप लगाS थे कि वह फेक न्यूज और इतिहास को अलग ढंग से पेश कर पोलिश लोगों को यूक्रेन के प्रति भड़का रहा है। पोलैंड के लोग आम तौर पर रूस को पसंद नहीं करते हैं। एबीडब्ल्यू और यूरोपियन विशेषज्ञों के मुताबिक रूस हाइब्रिड वॉर का सहारा लेकर पोलैंड की जनता के नजरिए को बदलने की कोशिश कर रहा है। वह क्रीमिया के अलगाव को जायज ठहराने में लगा है। पोलैंड की सुरक्षा एजेंसी एबीडब्ल्यू ने तो पिछले साल मई में इस संदर्भ में साक्ष्य भी परोस दिया था कि कैसे उसने रूस के दो हाइब्रिड वॉर नेटवर्क्स को खत्म किया है। पोलैंड का आरोप था कि “येकातेरिना सी” नाम की रूसी महिला इन नेटवर्कों से जुड़ी थीं।

विश्वभर के रक्षा विशेषज्ञों की बातों पर गौर किया जाए तो उनके मुताबिक 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान हिज्बुल्लाह ने एक खास रणनीति का सहारा लिया। हिज्बुल्लाह ने गलत जानकारियों और तथ्यों को अपने हिसाब से पेश कर लोगों की विचारधारा पर असर डाला। तब से ही “हाइब्रिड वॉरफेयर” शब्द सामने आया। अब यह आधुनिक युद्ध नीति का हिस्सा बनता जा रहा है। हाइब्रिड वॉर में जनमानस की सोच, साइबर स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मुख्य हथियार होते हैं।

हाइब्रिड वॉरफेयर का ताजा शिकार है भारत, जो लगातार आसानी से इसकी जद में आता जा रहा है। यह भारत की अस्मिता, संप्रभुता, सभ्यता, सांस्कृतिक, सामाजिक परिवेश को तबाह करने वाला बेजोड़ टूल साबित होते जा रहा है।

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