मसूद अजहर को लेकर चीन से दो-दो हाथ करने को तैयार है अमेरिका

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अमेरिका अब आतंकवाद और मसूद अजहर के मामले में चीन से आमने-सामने के टकराव का मन बना चुका है। दरअसल, 27 मार्च को अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फिर से एक प्रस्ताव लाया। इस प्रस्ताव में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना अजहर मसूद पर प्रतिबंधित लगाने की बात है।

अमेरिका के इस कदम के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के साथ सीधे-सीधे टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालांकि, अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि इस प्रस्ताव पर कब मतदान होगा। आशंका जताई जा रही है कि हमेशा की तरह एक बार फिर चीन इस पर लगा सकता है। क्योंकि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में चीन भी है। अन्य चार सदस्य ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और अमेरिका हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए अब तक चार बार प्रयास किए जा चुके हैं। पर चीन ने हर बार अड़ंगा लगा दिया। 13 मार्च को चौथी बार चीन ने मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र में ब्लैक लिस्ट में डालने के प्रयास पर पानी फेर दिया था। मसूद अजहर के संगठन जैश-ए-मोहम्मद को पहले ही 2001 में संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में डाल दिया था।

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में इस प्रयास के असफल होने के बाद अमेरिका अजहर को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को लेकर सीधे सुरक्षा परिषद पहुंच गया है। इस प्रस्ताव में अजहर को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधित आतंकियों की सूची में रखे जाने की बात है।

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उधर, अमेरिका के विदेश सचिव माइक पोम्पिओ ने चीन को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के मुद्दे पर चीन के दोहरे चरित्र को दुनिया बर्दाश्त नहीं कर सकती है। चीन जहां मसूद अजहर को आतंकी नहीं मानता है वहीं अपने यहां के उइगर मुसलमान उसे आतंकी दिखाई देते हैं।

वह अपने यहां लाखों मुसलमानों का उत्पीड़न करता है। एक तरफ उसने अपने यहां मुसलमानों को डिटेंशन कैंप में रखा है और दूसरी तरफ खतरनाक आतंकी-संगठनों को बचाना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जब भी इस्लामी आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है तो चीन बार-बार रुकावट बन जाता है।

27 मार्च को अमेरिकी विदेश सचिव ने एक ट्वीट किया, “दुनिया मुसलमानों के प्रति चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती। एक तरफ चीन अपने देश में 10 लाख से अधिक मुसलमानों को प्रताड़ित करता है और दूसरी तरफ हिंसक इस्लामिक आतंकी समूहों को यूएन में प्रतिबंधित होने से बचाता है।”

उनका इशारा 13 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन के उस प्रस्ताव के पास होने में अडंगा डालने की ओर था जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की तैयारी थी।

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